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“साया” न जाने कहाँ खोया है मुझसे या गुमसुम सा बैठा है किसी कोने मे छिप के
नराज है मुझसे या इस अँधेरे से घबराया है
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कल शाम ढले, जब लगा लौटने सूरज भी, अपने घर की ओर (more…)