कभी वो चित्र आँखो के सामने फिर से प्रकट होता
वो चित्र जिसे कई बार मन की दीवारो पर अपनी आशाओ के
रंगो से बनाया था, कभी अकेले और कभी किसी के साथ मिल कर
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वास्तविक्ता
पल
वक्त की बदलती हवाओ ने
अक्सर ऐसे मोड पर ला कर छोडा है
जहाँ कुछ राहे आपस मे मिलती है
दिखती है अलग दिशाओ को जाती
पर सभी अतीत के, किसी धागो से जा कर मिलती है
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लकीरो के निशान
कागज पर बना कर, मिटाई गई लकीरो के कुछ बचे हुऐ निशान
ढूंढते है उन गायब हिस्सो को, जिनसे मिले हुऐ थे कभी
आडी तिरछी लकीरो के, एक अजब से समूह थे कभी
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अनदेखा
पलको के बीच, बना के एक छोटा सा झरोखाँ
देखा जब दुनिया को, पाया कि कितना कुछ अब तक है अनदेखा
बूँद
एक बूँद, डगमगाती, पर रुकी हुई मेरी हथेली पर
जगमगाती, झिलमिलाती, व्याकुल सी फिसलने को
कभी तो एहसास दिलाती अपनी स्थिरता का
अगले ही पल बदलती है रुप अनिश्चितता का
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पछाईयाँ
बादलो की परछाईयो को पकडने की चाह मे
चल पडा मै उठ के यूहीँ, एक अंजानी सी राह मे
सोचा न एक पल भी, कि कैसी ये चाह है
जिसकी न मंजिल, ये कैसी वो राह है
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ईंताजार
एक मद्धम सी खुशबू, हवा के झोंके से बोली
ले कर चल मुझको वहा, जहा वो बैठा होगा
गुम उन जुल्फो की यादो मे
एक पहेली
जिन्दगी भी एक अजीब सी पहेली है
कभी भीड मे, कभी बिलकुल अकेली है
कभी दो मुठ्ठी सितारो की झिलमिलाती रात
हर तरफ रोशनी और खुशीयो की सौगात
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याद आते हो
जब गर्म हवा मुझको यूँ आकर झुलसाती है
तुम याद आते हो
कहीँ छाँव मे रुक जाता हुँ, तुम याद आते हो
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सुबह
हर शाम जिन्दगी, सोचती है उस सुबह के बारे मेँ
जो आज आयी थी, आयी थी और, सूरज की किरणो मे भर
कितनी आशाऐँ लायी थी
उजाला ऐसी शक्त्ति का, जो मेरे अरमानो को पहचान ने
और पूरा करने मे मेरे साथ रहती
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