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वास्तविक्ता

26 Dec

कभी वो चित्र आँखो के सामने फिर से प्रकट होता

वो चित्र जिसे कई बार मन की दीवारो पर अपनी आशाओ के

रंगो से बनाया था, कभी अकेले और कभी किसी के साथ मिल कर
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पल

27 Aug

वक्त की बदलती हवाओ ने

अक्सर ऐसे मोड पर ला कर छोडा है

जहाँ कुछ राहे आपस मे मिलती है

दिखती है अलग दिशाओ को जाती

पर सभी अतीत के, किसी धागो से जा कर मिलती है

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लकीरो के निशान

20 Apr

कागज पर बना कर, मिटाई गई लकीरो के कुछ बचे हुऐ निशान
ढूंढते है उन गायब हिस्सो को, जिनसे मिले हुऐ थे कभी
आडी तिरछी लकीरो के, एक अजब से समूह थे कभी
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अनदेखा

23 Jan

पलको के बीच, बना के एक छोटा सा झरोखाँ

देखा जब दुनिया को, पाया कि कितना कुछ अब तक है अनदेखा

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बूँद

13 Nov

एक बूँद, डगमगाती, पर रुकी हुई मेरी हथेली पर

जगमगाती, झिलमिलाती, व्याकुल सी फिसलने को

कभी तो एहसास दिलाती अपनी स्थिरता का

अगले ही पल बदलती है रुप अनिश्चितता का
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पछाईयाँ

17 Oct

बादलो की परछाईयो को पकडने की चाह मे

चल पडा मै उठ के यूहीँ, एक अंजानी सी राह मे

सोचा न एक पल भी, कि कैसी ये चाह है

जिसकी न मंजिल, ये कैसी वो राह है

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ईंताजार

18 Sep

एक मद्धम सी खुशबू, हवा के झोंके से बोली

ले कर चल मुझको वहा, जहा वो बैठा होगा

गुम उन जुल्फो की यादो मे

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एक पहेली

16 Jul

जिन्दगी भी एक अजीब सी पहेली है

कभी भीड मे, कभी बिलकुल अकेली है

कभी दो मुठ्ठी सितारो की झिलमिलाती रात

हर तरफ रोशनी और खुशीयो की सौगात
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याद आते हो

25 Apr

जब गर्म हवा मुझको यूँ आकर झुलसाती है

तुम याद आते हो

कहीँ छाँव मे रुक जाता हुँ, तुम याद आते हो
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सुबह

08 Feb

हर शाम जिन्दगी, सोचती है उस सुबह के बारे मेँ

जो आज आयी थी, आयी थी और, सूरज की किरणो मे भर

कितनी आशाऐँ लायी थी

उजाला ऐसी शक्त्ति का, जो मेरे अरमानो को पहचान ने

और पूरा करने मे मेरे साथ रहती
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